Sunday, 12 August 2012
फिर बरेली शहर कर्फयु के हवाले
जन्माष्टमी पर दो दिन से हो रही खुराफात के मददेनजर जिला प्रशासन ने पहले थाना बारादरी क्षेत्र ओर फिर देर रात पूरे शहर में कर्फयु की घोषण कर दी।
Saturday, 11 August 2012
लीजिये नया हफता वसूली मार्ग
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर गुलामों से हफता वसूली की बाड़ सी आ गयी है। दिल्ली से लखनऊ मार्ग पर आठ नौ जगह गुलाम जनता से सरकारी तौर पर हफता वसूली के केन्द्र स्थापित थे ही । गुजरे गुरूवार को मार्ग चालू कर दिया गया जिसपर कम से कम चार जगह गुलामों से उगाही करने का लाईसेंस सरकार ने अपने चहेते पूंजी पतियों को दे दिया है जिसका उदघाटन सूबे के मालिक अखिलेश यादव ने गुरूवार को किया।
मायाराज की हठधर्मी और कदम कदम पर गुलामों से की जाने वाली उगाही से ऊब कर गुलामों ने इस बार सपा को रोजगार दे दिया गुलाम जनता को गलत फहमी थी कि अखिलेश को सूबे का महाराज बना देने से गुलामों को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन गुलामों के अरमान गन्दे नाले में बह गये। उगाही बादस्तूर जारी है और पूंजि पतियों की तिजोरियों को अखिलेष यादव की सरकार भी भरने लगी।
मायाराज की हठधर्मी और कदम कदम पर गुलामों से की जाने वाली उगाही से ऊब कर गुलामों ने इस बार सपा को रोजगार दे दिया गुलाम जनता को गलत फहमी थी कि अखिलेश को सूबे का महाराज बना देने से गुलामों को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन गुलामों के अरमान गन्दे नाले में बह गये। उगाही बादस्तूर जारी है और पूंजि पतियों की तिजोरियों को अखिलेष यादव की सरकार भी भरने लगी।
फिर माहोल बिगाड़ने की कोशिश
बरेली-(अनूप सकसेना) लगातार हफता भर कर्फयु की मार ओर तीन जान लेकर भी खुराफातियों को सकून नहीं मिला। थाना बारादरी के मोहल्ला हजियापुर में आज शाम लगभग आठ बजे अमन दुश्मनों ने माहोल बिगाड़ने की कोशिश की। घण्टा भर बाद भारी फोर्स के साथ पहुंचे पुलिस व जिला प्रशासन के अफसरान ने मामले को ठण्डा कराकर काबू पा लिया, मौके पर भारी फोर्स तैनात कर दिया गया है।
दो हफते पहले ही आंवला में कांवडि़यों से शुरू हुई खुराफात ने चन्द घण्टों में ही पूरे शहर को लपेटे में लेकर कर्फयू के हवाले कर दिया था। हफता भर कर्फयु की मार झेल चुके मजदूर अभी ठीक से संभल नही पाये थे कि आज शाम आठ बजे के लगभग कुछ शरारतियों ने दूसरे समुदाय धार्मिक उत्सव में बज रहे डीजे की आवाज कम करने को कहा। इसी को लेकर कहा सुनी होने के बाद दोनो पक्ष आमने सामने आ गये और जमकर पथराव, फायरिंग की जाने लगी। फोन पर पुलिस को सूचना दी लगभग घण्टा भर बाद फोर्स के साथ आला अफसरान ने मोके पर पहुंचकर काबू किया। फिलहाल हालात काबू में हैं। तीन चार युवकों के घायल होने की खबर है। खबर लिखे जाने तक कोई गिरफतारी नही हो सकी थी।
दो हफते पहले ही आंवला में कांवडि़यों से शुरू हुई खुराफात ने चन्द घण्टों में ही पूरे शहर को लपेटे में लेकर कर्फयू के हवाले कर दिया था। हफता भर कर्फयु की मार झेल चुके मजदूर अभी ठीक से संभल नही पाये थे कि आज शाम आठ बजे के लगभग कुछ शरारतियों ने दूसरे समुदाय धार्मिक उत्सव में बज रहे डीजे की आवाज कम करने को कहा। इसी को लेकर कहा सुनी होने के बाद दोनो पक्ष आमने सामने आ गये और जमकर पथराव, फायरिंग की जाने लगी। फोन पर पुलिस को सूचना दी लगभग घण्टा भर बाद फोर्स के साथ आला अफसरान ने मोके पर पहुंचकर काबू किया। फिलहाल हालात काबू में हैं। तीन चार युवकों के घायल होने की खबर है। खबर लिखे जाने तक कोई गिरफतारी नही हो सकी थी।
Thursday, 9 August 2012
भारी पड़ गयी चकल्लस
बरेली-(रिपोर्ट एम.के.अली व सलमान खान) थाना सीबी गंज क्षेत्र में स्थित माचिस फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर द्वारा अपने साथी मजदूर से की गयी मजाक दोनों को ही भारी पड़ गयी, एक की जान गयी तो दूसरे पर मुकदमा लद गयी।
फैक्ट्री में ठेकेदार मुशर्रफ अली के दर्जनों मजदूर काम करते हैं। लगभग सभी मजदूर आसपास के गांवों से आते हैं। गुजरी 7 अगस्त को भी लेवर काम कर रही थी इन्हीं में थाना क्षेत्र के गांव जोगीठेर के शहनूर का तीस वर्षीय पुत्र तसलीम और गांव सनैया रानी के लालशाह का बेटा हामिद अली भी काम कर रहा था। इन्हीं के साथ काम कर रहे गांव पस्तौर के सुशील कुमार ने बताया कि दोपहर के समय हम सभी प्रेशर से सफाई कर रहे थे कि तसलीम ने मजाक करते हुए प्रेशर का पाईप हामिद के शौच की रास्ते में डाल दिया, कुछ ही सैकेण्ड में हामिद चीख मार कर गिर गया ओर दर्द से तड़पने लगा, हम सभी मजदूर, ठेकेदार व फैक्ट्री के कुछ कर्मचारी हामिद को तुरन्त ही बीमा अस्पताल (ईएसआई डिस्पैंसरी) लेकर गये जहां डाक्टर ने जिला अस्पताल रैफर कर दिया, यहां कोई देखरेख होने की जगह उल्टे डाक्टर ने हम लोगों से अभद्रव्यवहार किया। परेशान होकर हम हामिद को एक निजि अस्पताल ले गये। 8 तारीख को उसका आप्रेशन किया गया और आज वह खत्म हो गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। जिसे आज रात दस बजे सुपुर्दे खाक कर दिया गया। खबर लिखे जाने तक तसलीम गिरफतार नहीं हो सका था पुलिस दबिशें दे रही है।
Wednesday, 8 August 2012
विद्रोह के लिए उकसाने का साधन बनी सोशल नेटवर्किंग साईटें
आजकल लोग देश की शान्ति को तबाह करने और विद्रोह के लिए लोगों को उकसाने के लिए फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साईटों का सहारा लिए हुए है। फेसबुक पर जमकर बेबुनियाद तस्वीरें लोड करके उन्हें पाकिस्तान की होना बताकर लोगों को देशद्रोह के लिए खुले शब्दों में उकसाने का काम कर रहे है।
देखने वाली बात तो यह है कि इनपर न तो किसी कानून को एतराज है और न ही किसी सुरक्षा एजेंसी को ही आपत्ति है। लेकिन जब कोई मुसलमान, सिर्फ मुसलमानों से ही धर्म का पालन कड़ाई से करने के लिए कहता है तो वह सुरक्षा एजेंसिंयो के साथ साथ कानून, मीडिया को भी आतंकी दिखने लगता है।
बरेली के कुछ लोग तो लोगों को विद्रोह के लिए उकसाने के काम में ही व्यस्त है।
Tuesday, 7 August 2012
लौटती अमन को वापिस ढकेलने की कोशिश
बरेली-तीन बेकसूरों की जान जाने और हफते भर तक कर्फयु की मार झेल चुके
शहर में पूर्व जिला अधिकारी व एसएसपी की मेहनत के नतीजे के तोर पर अमन
वापिस लौटने लगी। मजदूरों के घरों में समय से बच्चों को रोटी मिलने लगी।
लेकिन यह शहर के ही कुछ लोगों को पच नहीं रही।शहर में लौटती अमन को वापिस
ढकेलने के प्रयास शुरू हो गये।
आज शिव सेना ने एक अजीबो गरीब मांग के साथ जिला प्रषासन को ज्ञापन दिया
जिसमें मांग की गयी कि मस्जिदों पर लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर रोक लगाई
जावे। साथ ही जोगी नवादा के इमरान के कातिलों की हिमायत करते हुए उनकी
सुरक्षा की बात भी कही गयी।
इसमें कोइ्र दो राय नहीं कि शहर में साजिश के तहत फैलाई गयी गुण्डा
गर्दी से निबटने के लिए पूर्व डीएम व एसएसपी ने काफी हद तक सूझबूझ के साथ
काम लेते हुए जल्दी ही शान्ति बनाने के भरसक प्रयास किये। आज के इस नये
शिगूफे के बाद अन्दूनी तनाव जाग उठा है। साथ ही प्रशासन के सामने फिर से
नया चैलेंज खड़ा हुआ है।
शहर में पूर्व जिला अधिकारी व एसएसपी की मेहनत के नतीजे के तोर पर अमन
वापिस लौटने लगी। मजदूरों के घरों में समय से बच्चों को रोटी मिलने लगी।
लेकिन यह शहर के ही कुछ लोगों को पच नहीं रही।शहर में लौटती अमन को वापिस
ढकेलने के प्रयास शुरू हो गये।
आज शिव सेना ने एक अजीबो गरीब मांग के साथ जिला प्रषासन को ज्ञापन दिया
जिसमें मांग की गयी कि मस्जिदों पर लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर रोक लगाई
जावे। साथ ही जोगी नवादा के इमरान के कातिलों की हिमायत करते हुए उनकी
सुरक्षा की बात भी कही गयी।
इसमें कोइ्र दो राय नहीं कि शहर में साजिश के तहत फैलाई गयी गुण्डा
गर्दी से निबटने के लिए पूर्व डीएम व एसएसपी ने काफी हद तक सूझबूझ के साथ
काम लेते हुए जल्दी ही शान्ति बनाने के भरसक प्रयास किये। आज के इस नये
शिगूफे के बाद अन्दूनी तनाव जाग उठा है। साथ ही प्रशासन के सामने फिर से
नया चैलेंज खड़ा हुआ है।
Sunday, 5 August 2012
जो आता है लूटने वाला आता है-अपनी इस तकदीर की मारी दिल्ली में।
इतिहास गवाह है कि दिल्ली के तख्त पर जो आया वह देश की जनता को गुलाम बनाकर लूटता हुआ ही आया। चाहे वो विदेशी हो या देसी। लूटा सभी ने और आज भी लूट बदस्तूर जारी है। फर्क सिर्फ इतना है कि विदेशी तलवारों के बल पर लूटते थे और देसी करों (टैक्सेज) के बल पर गुलामों को लूट रहे हैं। और कम से कम गुजरे आठ साल में कदम कदम पर लूट को सरकारी जामा पहना दिया गया है। दरअसल बाबरी मस्जिद को शहीद कराने की साजिश रचने के बाद देश के शरीफ गुलाम वोटरों ने कांग्रेस के हाथ में कटोरा थमा दिया। लगभग पन्द्रह साल तक कांग्रेस औकात पर रही, क्योंकि इस अर्से में कांग्रेस के पास कोई घडि़याली आंसू बहाने वाला नमूना नहीं था फिर सोनियां गाधी ने गुलाम जनता को उल्लू बनाने की ट्रेंिग हासिल करके घडि़याली आंसू बहाना शुरू कर दिये मेरे सीधे साधे गुलाम देषवासी एक बार फिर कांग्रेस के झांसे में आ गये, और दे दिया कांग्रेस के हाथ में देश को लूटने का मौका। बस क्या था कांग्रेस ने मचा दी लूट। रोज सुवह को हर चीज के दाम बढ़े मिलते हैं खास तौर पर डीजल, पैट्रौल, रसोई गैस पर। बढ़ौतरी भी चवन्नी अठन्नी की नहीं सीधे सीधे पांच दस पन्द्रह रूपये की। जाहिर सी बात है कि डीजल के दामों में की जा रही अंधाधुन इजाफे का सीधा असर गरीब गुलामों पर पड़ता है। डीजल पर तीन रूपये प्रति लीटर बढ़ने पर आटो, बस वाले प्रति सवारी एक से पांच रूपये बढ़ा देते है अब जिस गरीब के पास दस रूपये ही हों वह पन्द्र रूपये आटो को कहां से दे।
दरअसल सोनिया गांधी नामक रिमोट से चलने वाली केन्द्र की कांग्रेस बाहुल्य मनमोहन सिंह सरकार बड़े उद्योगपतियों को सैटिंग के साथ माल कमवाने का काम कर रही है जाहिर है कि इससे सरकार में बैठे और सरकार के कन्ट्रोल रूम को भी बड़ा फायदा पहुंचता है बरना बेवजह कोई किसी को लूट मचाने की छूट नहीं देता। मिसाल के तौर पर जब जब तेल या गैस पर दाम बढ़ाये गये तब तब पैट्रौल पम्पों, गैस एजेंसियों को एक रात में ही लाखों रूपये का मुनाफा हुआ। सरकार ने कभी यह हिसाब नहीं देखा कि जिस पम्प या एजेंसी के पास दाम बढ़ने से पहले का जो स्टाक मौजूद है उसपर गुलामों को क्यों लूटा जा रहा है।
केन्द्र की कांग्रेस बाहुल्य मनमोहन सिंह सरकार ने बड़े उद्योगपतियों के माल में चैगुना इजाफा करने के लिए देश में राज्य मार्गों के निमार्ण का ठेका इन्हें दिया, ठेका यानी लूटने का सरकारी लाईसेंस। इन कम्पनियों ने जगह जगह मार्गों को सुधार कर हर पचास किलोमीटर की दूरी पर एक लूट केन्द्र स्थापित कर दिया। हर आने जाने वाले वाहन से 21 रूपये से 200 रूपये तक प्रतिगुजर का हफता वसूली की जाने लगी। सरकारों द्वारा कराई जा रही इस हफता वसूली पर सवाल यह पैदा होता है कि ‘‘किस नियम के आधार पर वसूला जा रहा है गुलामी टैक्स? वाहनों से पहले ही रोड टैक्स लिया जाता है साथ ही सैकड़ों तरह के दूसरे टैक्स भी गुलाम देते ही है तो फिर सड़के देना सरकार का उत्तरदायित्व है। अगर सरकार किसी सड़क को या शहर को अच्छा बना देती है तो उसपर या उसमे से गुजरने का टैक्स वसूला जाना कतई गैर कानूनी और तक विहीन ही नहीं बल्कि सीधी भाषा में लूट ही कहा जायेगा।
दिल्ली से लखनऊ की दूरी लगभग 500 किलोमीटर है। इस मामूली से दूरी तय करने आपको कमसे कम आठ जगह गुलामी टैक्स अदा करना पड़ेगा। दिल्ली से निकलते ही नोयडा से लखनऊ तक कम से कम आठ जगह बड़े उद्योगपतियों को लूट करने का लाईसेंस दिया गया है। बताते चलें कि यह लूट सिर्फ गुलामों से ही की जाती है खादी और खाकी से हफता वसूली नहीं की जाती। बाकी गुलाम चाहे एम्बूलेंस में ही क्यों न हो इन लुटेरों को हफता दिये बिना नही जा सकता।
ज़रा सोचिये कि एक ट्रक कुछ माल लाद कर दिल्ली से लखनऊ जाये और उसे रास्ते में डीजल खर्च के अलावा पुलिस एंव आरटीओ की सेवा के साथ साथ कम से कम दो हजार रूपये उद्योगपतियों को हफता के रूप में अदा करना पड़ेगा तो वह भाड़ा बढ़ायेगा और जब माल ढुलाई का भाड़ा बढ़ेगा तो दुकानदार माल बेचेंगे भी महंगा, सोचिये लुटा कौन.... गुलाम ही। खादी और खाकी को 95 फीसद चीजें खरीदकर लेनी नहीं पड़ती, इसलिए खादी या खाकी पर राज्य मार्गों पर कराई जा रही हफता वसूली का फर्क नहीं पड़ता। ऐसा भी नहीं कि यह सिर्फ केन्द्र का ही काम हो बल्कि इस काम में सूबाई सरकारें भी दो कदम आगे ही रहने की कोशिश में नजर आती हैं।
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